Voices of Dignity Inspiring Stories
Discover inspiring experiences shared by senior citizens, families, volunteers and social leaders whose lives have been positively touched through the SANGAM movement.
Guiding the Vision of SANGAM
On 02 May 2025, under the guidance and presence of distinguished national leaders, representatives of the Ministry of Social Justice & Empowerment, and senior members of Brahma Kumaris, a landmark Memorandum of Understanding (MoU) was signed to promote the dignity, well-being, and active participation of senior citizens across India.
Under this nationwide initiative, SANGAM – Age with Pride, Live with Dignity is being implemented across the country with the vision of creating a society where every elder feels respected, connected, valued, and empowered.
Every Experience
Has a Story
Behind every smile, every renewed sense of purpose, and every moment of connection lies a story worth sharing. Through SANGAM, senior citizens, families, volunteers, and communities have discovered new opportunities for engagement, dignity, and meaningful living.
These experiences reflect the positive impact of compassion, respect, and collective action in creating a society where every individual feels valued.
Inspiring Journeys Through SANGAM
Discover inspiring stories of transformation, dignity and renewed purpose from across India.
कृष्णा बहन
जीवन ने कई उतार-चढ़ाव दिखाए। लगभग दो वर्ष पहले पति के देहांत के बाद जीवन में एक खालीपन और अकेलेपन की अनुभूति बढ़ने लगी...
जीवन ने कई उतार-चढ़ाव दिखाए। लगभग दो वर्ष पहले पति के देहांत के बाद जीवन में एक खालीपन और अकेलेपन की अनुभूति बढ़ने लगी। दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जिनमें एक बेटी गुरुग्राम में इंजीनियर के रूप में कार्यरत है।
इसी बीच संगम प्रॉजेक्ट में आने का निमंत्रण मिला। प्रारंभ में यह केवल एक सामान्य कार्यक्रम लगा, लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद जीवन में एक नया मोड़ आया।
संगम प्रॉजेक्ट के वातावरण में आत्मीयता, अपनापन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। वहाँ मिले स्नेह और सम्मान ने मन के अकेलेपन को काफी हद तक कम कर दिया।
अब हर दिन केवल समय बिताने के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और सेवा के लिए जीने का संकल्प बनने लगा। पहले जहाँ मन में निराशा और अकेलेपन की भावना रहती थी, वहीं अब मन अधिक शांत, स्थिर और प्रसन्न रहने लगा है।
धर्मपाल जी
बेटों के अलग रहने और जीवन में बढ़ते अकेलेपन के बीच धर्मपाल जी का मन भीतर से टूटने लगा था। संगम प्रोजेक्ट से जुड़ने के बाद उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान, आत्म-सम्मान और जीवन का नया उद्देश्य मिला। आज 72 वर्ष की आयु में वे प्रसन्नता, सम्मान और आत्मबल के साथ जीवन जी रहे हैं...
अकेलेपन से आत्म-सम्मान और आनंद का सफर जीवन का उत्तरार्ध अक्सर इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ सांसारिक जिम्मेदारियाँ तो पूरी हो जाती हैं, लेकिन भीतर एक गहरा खालीपन पैर पसार लेता है। मैं धर्मपाल, कलियाना (खण्ड झोझू कलां, जिला चरखी दादरी) का निवासी हूँ। वर्तमान में 72 वर्ष की उम्र में भी मैं कर्मठता के साथ एक क्रेशर पर मुंशी का कार्य संभालता हूँ। मेरे दो बेटे हैं, जो अपनी-अपनी व्यस्तताओं के कारण मुझसे अलग रहते हैं। बेटों का अलग होना आज के समय की एक सामान्य स्थिति हो सकती है, लेकिन एक पिता के रूप में मेरे लिए वह दौर बेहद कष्टदायक था। काम से लौटने के बाद घर की खामोशी और अपनों की दूरी मुझे अंदर ही अंदर कचोटती थी। वह अकेलापन मुझे धीरे-धीरे खाए जा रहा था। ऐसे ही अंधकारमय समय में, ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चलाए जा रहे 'संगम प्रोजेक्ट' के रूप में मेरे जीवन में उम्मीद की एक नई किरण चमकी। मुझे इस प्रोजेक्ट की ओर से एक आमंत्रण मिला। उस समय मुझे यह नहीं मालूम था कि यह निमंत्रण केवल एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि मेरे पूरे जीवन के कायाकल्प का आमंत्रण है। मैं वहाँ पहुँचा और उस सकारात्मक माहौल ने पहली ही बार में मेरे अशांत मन को एक असीम शांति का अहसास कराया। "जब संसार के रिश्ते दूरियाँ बना लेते हैं, तब ईश्वरीय ज्ञान और स्नेह आत्मा को फिर से जीने की नई राह दिखाता है।" वहाँ के भाई-बहनों के निस्वार्थ प्रेम, आदर और ज्ञान से प्रभावित होकर मैं धीरे-धीरे वहाँ का नियमित विद्यार्थी बन गया। रोज़ की मुरली, राजयोग का अभ्यास और सात्विक वातावरण ने मेरे सोचने का नज़रिया पूरी तरह बदल दिया। मुझे समझ आया कि अकेलापन कोई अभिशाप नहीं, बल्कि स्वयं को जानने और परमात्मा से जुड़ने का एक स्वर्णिम अवसर है। क्रेशर पर मुंशी के कार्य के साथ-साथ अब मेरा बाकी का समय साधना, सेवा और आत्म-चिंतन में बेहद खूबसूरती से बीतने लगा। आज, 72 वर्ष की इस आयु में संगम प्रोजेक्ट के माध्यम से मिले ईश्वरीय ज्ञान की बदौलत मेरे जीवन की पूरी तस्वीर बदल चुकी है। वह अकेलापन जो कभी नासूर बना हुआ था, अब पूरी तरह गायब हो चुका है। अब मैं किसी बाहरी सहारे के बिना, अपने आंतरिक बल पर बेहद खुशी-खुशी और पूर्ण सम्मान के साथ अपना जीवन जी रहा हूँ। ब्रह्माकुमारीज़ के इस पावन मंच ने मुझे स्वयं के सच्चे स्वरूप की पहचान कराकर एक गौरवमयी और आनंदमयी जीवन का उपहार दिया है।
